satyam shivam sunderam
Friday, 30 March 2012
ghata
इन फिजाओ में ,इन हवाओं में बैठे खुली हवाओं मे,न गम है घटाओं का ,न डर है कड़कती बिज्लिओंका ,अपने आप में गूम है ,फूलों के खिल्नेसे ज़माने से बेखबर है ,लेकिन ये फुल कभी न कभी मुरज़ाने है ..............
kya naam de?
DULHAN
कीतनी आशाएं ,कीतनी उम्मीदे ,कीतने सपने संजो लाता है ये एक पल .ज़िन्दगी का फलसफा बन जाता है ये एक पल .पागल है दील बेचारा जींदगी के फ़साने को नहीं जानता.
Tuesday, 27 March 2012
NISHA
ये कैसी नि शा है जिसमे दोनों चाँद जमीं पर है ।एक चाँद सो रहा है ,दूसरा उसका दीदार कर रहा है
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)