Friday, 30 March 2012

ghata

इन फिजाओ में ,इन हवाओं में बैठे खुली हवाओं मे,न गम है घटाओं का ,न डर है कड़कती बिज्लिओंका ,अपने आप में गूम है ,फूलों  के खिल्नेसे ज़माने से बेखबर है ,लेकिन  ये फुल कभी न कभी मुरज़ाने है ..............

kya naam de?


DULHAN

 कीतनी आशाएं ,कीतनी उम्मीदे ,कीतने सपने संजो लाता है ये एक पल .ज़िन्दगी का फलसफा बन जाता है ये एक पल .पागल है दील बेचारा जींदगी के फ़साने को नहीं जानता.