satyam shivam sunderam
Friday, 6 January 2012
ANDHERA
शम्मा जलने से अँधेरा दूर होता है ,लेकीन वह शम्मा कहा से लाऊ जो दील का अँधेरा दूर कर दे ?इंतज़ार की शम्मा जलती रही मगर दीदार न हो सका ,अब तो उम्मीदों की शम्मा जलाकर इंतज़ार ए प्यार करते है वीजय रेणुके
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment