यादें आती है ,यादें जाती है ,कभी हंसाती है ये यादें ,कभी रुलाती है ये यादें ,कभी बहोत तडपाती है ये यादें ,कभी बहोत कुछ बोलती है ये यादें ,कभी बीना बोले ही चली जाती है ये यादें ,कभी दामन से यूँ चीपक जाती है ये यादें की दामन फट जाता है लेकीन निशाँ नहीं मीट पाते.कभी दील से यों लीपट जाती है ये यादें की ज़िन्दगी खाक हो जाती है फीर भी मीट ती नहीं है ये यादें ,कब्र तक साथ नीभाती है ये यादें .............कब्र तक साथ नीभाती है यादें . वीजय रेणुके


No comments:
Post a Comment