satyam shivam sunderam
Sunday, 29 January 2012
HAKIKAT
हमसफ़र तो बहोत मील जाते हे राह में , मगर कोई हमराज़ नहीं मीलता । सायें तो बहोत है राह में मगर कोई हमसाया नहीं मीलता ।अपना कहने वाले बहोत है मगर कोई मेरा अपना नहीं मीलता । दोस्त दोस्त कहने वाले बहोत है मगर दोस्ती नीभाने वाला कोई नहीं मीलता ........................................
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